आज के समय में बिजली के बढ़ते बिल और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण Solar System लगवाने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। हर कोई चाहता है कि उसके घर की बिजली धूप से बने और महीने का बिल या तो बहुत कम आए या बिल्कुल शून्य हो जाए। लेकिन सोलर सिस्टम लगवाते समय सबसे बड़ी उलझन यही होती है कि आखिर अपने घर के लिए कितने किलोवाट यानी kW का सोलर सिस्टम सही रहेगा।

कई बार लोग कंपनी या डीलर की सलाह पर जरूरत से ज्यादा बड़ा प्लांट लगवा लेते हैं और बाद में महसूस करते हैं कि खर्च तो ज्यादा हो गया लेकिन फायदा उतना नहीं मिला। इसलिए सही कैपेसिटी चुनना बेहद जरूरी है ताकि आपकी इन्वेस्टमेंट पूरी तरह वसूल हो और लंबे समय तक फायदा मिलता रहे।
अपने घर की सही सोलर कैपेसिटी कैसे तय करें
सही सोलर सिस्टम चुनने का सबसे आसान और भरोसेमंद तरीका है अपने पुराने बिजली बिल को समझना। इसके लिए आपको पिछले 12 महीनों के बिजली बिल देखने चाहिए, क्योंकि गर्मी और सर्दी में बिजली की खपत अलग-अलग होती है। अगर गर्मियों में आपका बिजली बिल ₹6000–₹7000 और सर्दियों में ₹3000–₹4000 के आसपास आता है, तो आपकी औसतन खपत लगभग 500 यूनिट प्रति महीना मानी जा सकती है।
सामान्य तौर पर भारत में 1 किलोवाट का सोलर सिस्टम प्रतिदिन औसतन 4 यूनिट बिजली बनाता है, यानी महीने में करीब 120 यूनिट। इस हिसाब से यदि आपकी खपत 500 यूनिट है, तो आपके लिए लगभग 4.5kW से 5kW का सोलर सिस्टम पर्याप्त रहेगा। इससे ज्यादा क्षमता का सिस्टम लगवाने से न तो आपकी बचत बहुत ज्यादा बढ़ती है और न ही निवेश जल्दी वसूल होता है, इसलिए जरूरत से ज्यादा बड़ा प्लांट लगवाना समझदारी नहीं मानी जाती।
ज्यादा kW का सोलर सिस्टम लगवाना क्यों नुकसानदायक हो सकता है
अक्सर लोगों को लगता है कि अगर ज्यादा बिजली बनेगी तो सरकार उसे खरीद लेगी और उन्हें मुनाफा होगा। लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। सरकार या डिस्कॉम आपकी अतिरिक्त बिजली को लगभग ₹2.71 प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदती है, जबकि वही बिजली अगर आप खुद इस्तेमाल करते हैं तो ₹6–₹8 प्रति यूनिट तक की बचत होती है। यानी एक्स्ट्रा जनरेशन से आपको उतना फायदा नहीं मिलता जितना खुद की खपत पूरी करने से मिलता है।
कई बार ज्यादा सोलर पैनल लगाने से आपकी शुरुआती लागत बढ़ जाती है और रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट यानी ROI का समय भी लंबा हो जाता है। इसलिए हमेशा वही सोलर सिस्टम लगवाना चाहिए जो आपकी औसत खपत के आसपास हो। थोड़ी बहुत ऊपर-नीचे खपत होना सामान्य है, लेकिन जानबूझकर बहुत बड़ा सिस्टम लगवाना लंबे समय में नुकसानदेह साबित हो सकता है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सिस्टम कैसे प्लान करें
यह बात बिल्कुल सही है कि समय के साथ घर की बिजली खपत बढ़ सकती है। बच्चों के बड़े होने पर नए कमरे बन सकते हैं, एसी, गीजर या इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी चीजें जुड़ सकती हैं। ऐसे में सबसे स्मार्ट तरीका यह है कि आप अभी के लिए अपनी मौजूदा जरूरत के अनुसार सोलर पैनल लगवाएं, लेकिन इन्वर्टर थोड़ा ज्यादा कैपेसिटी का चुनें। उदाहरण के लिए अगर आपकी अभी की जरूरत 5kW है, तो आप 5kW के पैनल लगवाकर 8kW या 10kW का इन्वर्टर लगवा सकते हैं।
इससे भविष्य में जब जरूरत बढ़ेगी, तो आपको केवल अतिरिक्त सोलर पैनल जोड़ने होंगे और पूरा सिस्टम आसानी से अपग्रेड हो जाएगा। बहुत से लोग सोचते हैं कि बड़ा इन्वर्टर लगाने से वायरिंग भी बाद में बदलनी पड़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं होता। वायरिंग शुरू से ही इन्वर्टर की कैपेसिटी के अनुसार की जाती है, इसलिए बाद में केवल पैनल जोड़ने से काम हो जाता है। यह तरीका आपकी सोलर इन्वेस्टमेंट को लंबे समय तक उपयोगी बनाता है।
कितने kW के लिए कितना स्पेस और कितने सोलर पैनल चाहिए
आजकल बाजार में 400 से 550 वाट तक के हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनल उपलब्ध हैं, जिससे कम जगह में ज्यादा बिजली बनाई जा सकती है। सामान्य तौर पर 1kW के सोलर सिस्टम के लिए लगभग 80 से 100 वर्ग फुट छाया-मुक्त छत की जरूरत होती है और इसमें 2 से 3 पैनल लगते हैं।
अगर आप 3kW का सिस्टम लगवाते हैं, तो इसके लिए करीब 240 से 300 वर्ग फुट जगह चाहिए और लगभग 6 से 8 पैनल लगते हैं। वहीं 5kW के सोलर सिस्टम के लिए लगभग 400 से 500 वर्ग फुट छत की जरूरत होती है और इसमें 9 से 12 पैनल लगाए जाते हैं। छत पूरी तरह धूप वाली होनी चाहिए और किसी भी तरह की छाया पैनल पर नहीं पड़नी चाहिए, क्योंकि छाया पड़ने से पूरे सिस्टम की परफॉर्मेंस कम हो जाती है।
PM सूर्यघर योजना के तहत खर्च, सब्सिडी और मिडिल क्लास के लिए सही विकल्प
2026 में ऑन-ग्रिड रूफटॉप सोलर सिस्टम की औसत कीमत 1kW के लिए ₹55,000 से ₹75,000, 3kW के लिए ₹1.5 लाख से ₹2.2 लाख और 5kW के लिए ₹2.5 लाख से ₹3.5 लाख तक होती है, जिसमें पैनल, इन्वर्टर और इंस्टॉलेशन शामिल होते हैं। लेकिन PM सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सरकार सोलर सिस्टम पर आकर्षक सब्सिडी देती है।
1kW तक के सिस्टम पर ₹30,000 प्रति kW की सब्सिडी मिलती है, 2kW तक कुल ₹60,000 और 3kW या उससे ज्यादा सिस्टम पर अधिकतम ₹78,000 तक की सब्सिडी दी जाती है। इसका मतलब यह है कि 3kW का सिस्टम जो पहले ₹1.8 से ₹2.2 लाख में लगता था, अब सब्सिडी के बाद लगभग ₹82,000 से ₹1.2 लाख में लग सकता है।
एक मध्यम वर्गीय परिवार, जिसकी मासिक खपत 300 से 500 यूनिट के बीच है, उसके लिए 3kW से 5kW का सोलर सिस्टम सबसे सही विकल्प माना जाता है। इस सिस्टम से 4 से 6 साल में पूरा पैसा वसूल हो जाता है और उसके बाद 20 से 25 साल तक लगभग मुफ्त बिजली मिलती है, जो इसे एक समझदारी भरा और फायदे का सौदा बनाता है।
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