अब सोलर पैनल बनेंगे बिना चांदी के? चीन के नए इनोवेशन से Solar Panel में चाँदी के जगह लगेगा कॉपर

आज के समय में सौर ऊर्जा (Solar Energy) तेजी से दुनिया भर में फैल रही है और हर देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ, सस्ता और टिकाऊ बनाना चाहता है। लेकिन एक रोचक समस्या उभरकर सामने आई है की सोलर पैनल बनाने में उपयोग होने वाली चांदी (Silver) की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस महँगी धातु के कारण सोलर पैनल की लागत भी बढ़ रही है, जिससे दुनिया भर के निर्माता सस्ता विकल्प खोज रहे हैं। 

Silver-free solar panels new innovation

चांदी से कॉपर — क्यों हो रहा है बदलाव?

सोलर पैनलों में वैसे तो मुख्य रूप से सिलिकॉन का उपयोग होता है, लेकिन उसके ऊपर बहुत महीन ग्रिड लाइन्स (Conductive Grid Lines) लगाने के लिए हमेशा चांदी की पेस्ट का उपयोग होता रहा है। चांदी इसलिए पसंद की जाती है क्योंकि यह बहुत अच्छी विद्युत चालक (Conductive) होती है और लंबे समय तक स्थिर रहती है। 

लेकिन हाल ही में चांदी की कीमतें इतने उच्च स्तर पर पहुँच गई हैं कि यह सोलर पैनल की कुल लागत का 30–50 प्रतिशत तक हिस्सा बनने लगी है। इससे चीन जैसे बड़े सोलर पैनल निर्माता भारी दबाव में हैं, क्योंकि उनका लाभ मार्जिन पहले से ही बहुत पतला (लगभग 10% अनुमानित) है। 

इसीलिए इन कंपनियों ने कॉपर (Copper) की ओर रुख किया है जो सस्ता, उपलब्धता में अधिक और अच्छा चालक धातु है। कॉपर की कीमत चांदी की तुलना में बहुत कम है, इसलिए अगर इसे सफलतापूर्वक चांदी की जगह इस्तेमाल किया जा सके तो सोलर पैनल की कीमत काफी घट सकती है। 

चीन का नवीन इनोवेशन और तकनीकी चुनौतियाँ

चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पैनल निर्माता है, जो वैश्विक उत्पादन क्षमता का लगभग 80 प्रतिशत नियंत्रित करता है। इस वजह से जब चीन में बड़े स्तर पर चांदी की जगह कॉपर इस्तेमाल करने की कोशिशें शुरू हुईं, तो इसका असर पूरी सोलर इंडस्ट्री पर पड़ा।

सबसे पहले चांदी की परत के ऊपर कॉपर-कोटेड पेस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें कॉपर पार्टिकल्स को चांदी की एक पतली परत से ढक दिया जाता है ताकि ऑक्सीकरण (Oxidation) और प्रदर्शन समस्या ना हो। यह तरीका मौजूदा मशीनों और प्रक्रियाओं के साथ मिलकर काम कर सकता है, इसलिए इसे जल्दी अपनाया जा रहा है। 

कुछ बड़े कंपनियाँ जैसे Longi और JinkoSolar इस तकनीक को आगे बढ़ा रही हैं, खासकर उन पैनलों में जहाँ ग्रिड पैटर्न और प्रदर्शन की मांग थोड़ी कम होती है। लेकिन सबसे दिलचस्प कदम है शुद्ध कॉपर (Pure Copper) के उपयोग की दिशा में। कॉपर स्वयं तेज़ी से ऑक्सीड हो जाता है और सिलिकॉन के अंदर फैल सकता है, जिससे ऊर्जा का नुकसान हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिक और इंजीनियर अलग-अलग प्रोटेक्टिव लेयर्स (Barrier Layers) और नयी प्रक्रियाओं को विकसित कर रहे हैं ताकि कॉपर को सफलतापूर्वक सिलिकॉन सेल से जोड़ सकें। 

चाइना की नई टेक्नोलॉजी में H JT और TOPCon जैसे हाई-एफ़िशिएंसी सेल आर्किटेक्चर के लिए कॉपर के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें बहुत ही नाजुक, पतली और ऊँची ग्रिड लाइन्स बनाकर प्रदर्शन को बरकरार रखना महत्वपूर्ण है। 

मैस प्रोडक्शन की ओर बड़ा कदम

2026 के दूसरे क्वार्टर से Longi Green Energy Technology जैसी कंपनियाँ अपनी नई सोलर पैनल प्रोडक्शन में बेस-मेटल (जैसे कॉपर) धातुओं का उपयोग शुरू कर रही हैं, जिससे सस्ते पैनल जल्दी उपलब्ध हो सकेंगे। 

यह कदम यह संकेत देता है कि अब सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहकर कॉपर आधारित सोलर पैनल कम लागत वाले उत्पादन में पहुँच सकते हैं। इससे सोलर एनर्जी सिस्टम की कीमत कम होगी और अधिक लोगों के लिए यह मुक्त ऊर्जा स्रोत सुलभ बनेगा।

भविष्य में परिवर्तन और उम्मीदें

हालांकि कॉपर आधारित पैनल अभी भी चांदी पर पूरी तरह से आधारित पैनलों की तुलना में कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन इनोवेशन इतना तेज़ी से आगे बढ़ रहा है कि भविष्य में इन चुनौतियों का समाधान संभव लगता है। इसके बड़े फायदे होंगे जैसे कम लागत, सामग्री की उपलब्धता और टिकाऊ उत्पादन होगा। 

वास्तव में, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सालों में कॉपर आधारित सोलर पैनल इलेक्ट्रिक ग्रिड और सोलर उर्जा बाजार में मुख्य धारा बन सकते हैं। यह बदलाव सिर्फ लागत कम करने में मदद नहीं करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करेगा और हर देश में स्वच्छ ऊर्जा की पहुँच को सशक्त करेगा।

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